
धुनी कपास की बनी
पोनी को चरखे पर कात
बनाई थी खादी की
एक सफेद चादर
कुछ चूहे मिलकर
कुतरते रहे रात दिन
उसे सन ४७ से
और आज
छोटी छोटी कतरनों का ढेर
लगने लगा है जैसे
कच्ची कपास
उसे धुनना होगा
एक नई चादर
फिर से बुनना होगा.
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-स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनायें-


