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टूटा
जो यह
विश्वास का धागा..
फिर जुड़ेगा नहीं..
और
एक रिक्तता
सालती रहेगी जीवन भर....
तुम्हें भी
और
मुझे भी!!!
Monday, December 7, 2009
Tuesday, October 20, 2009
घी का दीपक..
Wednesday, September 23, 2009
Thursday, January 15, 2009
किसका विश्वास करुँ?
किसका विश्वास करुँ?
तुम्हारा ?
मगर
तुम!!
तुम तो मेरे अपने हो...
अपनों पर अब
कौन
विश्वास करता है...
अपनों से ही तो
मानव डरता है.
तुम्हारा ?
मगर
तुम!!
तुम तो मेरे अपने हो...
अपनों पर अब
कौन
विश्वास करता है...
अपनों से ही तो
मानव डरता है.
Wednesday, October 8, 2008
चिर मौन!!
बेखौफ
वैभवशाली
किन्तु
गंभीर और मौन...
तन पर
अरमानी का मँहगा सूट
और
उनसे उठती
फ्रांसीसी परफ्यूम की
उत्तेजक महक
की अनकही आवाज!!
सबने सुनी
सबने गुनी
सब साथ हो लिए....
घबरा हुआ वो
आँख में आसूं लिए
बदबूदार
चिथड़ों में लिपटा
भूख से परेशान
दो रोटी के लिए
चीख चीख कर
आवाज लगता रहा..
न जाने क्यूँ!!
उसकी आवाज
किसी भी कान ने
न सुनी..
या कि सुन कर भी
अनसुनी कर दी!!
वो चिल्लाते चिल्लाते
मौन हो गया..
चिर मौन!!
वैभवशाली
किन्तु
गंभीर और मौन...
तन पर
अरमानी का मँहगा सूट
और
उनसे उठती
फ्रांसीसी परफ्यूम की
उत्तेजक महक
की अनकही आवाज!!
सबने सुनी
सबने गुनी
सब साथ हो लिए....
घबरा हुआ वो
आँख में आसूं लिए
बदबूदार
चिथड़ों में लिपटा
भूख से परेशान
दो रोटी के लिए
चीख चीख कर
आवाज लगता रहा..
न जाने क्यूँ!!
उसकी आवाज
किसी भी कान ने
न सुनी..
या कि सुन कर भी
अनसुनी कर दी!!
वो चिल्लाते चिल्लाते
मौन हो गया..
चिर मौन!!
Tuesday, September 30, 2008
साँस की लूट
दो मुक्तक प्रस्तुत कर रही हूँ.
-१-
लिख रहे हैं जिन्दगी के रुप को
रोज होती सांस की इस लूट को
देखते ही देखते सब चुक गया
ढो रहे हैं हड्डियों के ठूंठ को.
-२-
देखती हूँ रोज अपने राम को
और उसमें ही बसे रहमान को
बांटते हैं धरम के जो नाम पर
क्या सजा दें आज उस शैतान को.
नवरात्रे की मंगलकामनाऐं.
-१-
लिख रहे हैं जिन्दगी के रुप को
रोज होती सांस की इस लूट को
देखते ही देखते सब चुक गया
ढो रहे हैं हड्डियों के ठूंठ को.
-२-
देखती हूँ रोज अपने राम को
और उसमें ही बसे रहमान को
बांटते हैं धरम के जो नाम पर
क्या सजा दें आज उस शैतान को.
नवरात्रे की मंगलकामनाऐं.
Sunday, September 28, 2008
तय करो किस ओर हो
तय करो किस ओर हो
इस ओर हो, उस ओर हो.
बातों को मनवाना हो तो
तर्कों में कुछ जोर हो.
या फिर
कुछ ऐसा कर जाओ कि
सदियों तक उसका शोर हो.
तय करो किस ओर हो
इस ओर हो, उस ओर हो.
इस ओर हो, उस ओर हो.
बातों को मनवाना हो तो
तर्कों में कुछ जोर हो.
या फिर
कुछ ऐसा कर जाओ कि
सदियों तक उसका शोर हो.
तय करो किस ओर हो
इस ओर हो, उस ओर हो.
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