Sunday, July 18, 2010

पतन


एक बार
बस
एक बार

कुछ ढीला
छोड़ दिया था
खुद को..

गिरी......

और फिर

पतन
की
कोई सीमा न रही!!!

Sunday, July 4, 2010

भ्रूण हत्या!!

नहीं चाहिये मुझे

तुम्हारी बराबरी का दर्जा

नहीं चाहिये मुझे

कोई सम्मान

नहीं चाहिये मुझे

रुपया पैसा...

मगर

मुझे इन सब के बदले

बस

और केवल

बस

जीने का अधिकार दे दो!!

मुझे मेरा परिवार दे दो!!

Monday, December 7, 2009

एक रिक्तता

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टूटा

जो यह

विश्वास का धागा..

फिर जुड़ेगा नहीं..

और

एक रिक्तता

सालती रहेगी जीवन भर....

तुम्हें भी

और

मुझे भी!!!

Tuesday, October 20, 2009

घी का दीपक..


इस दीपावली

एक घी का दीपक

छत की

उस मुंडेर पर भी रखा..

जहाँ आकर

तुम्हारी यादें

मुझसे मिला करती थी..

मेरे जीवन को

रोशन किया करती थी..

शायद दीपक की रोशनी

उन यादों को

भटकी राह दिखाये...

एक उम्मीद बाकी है अभी!!

Wednesday, September 23, 2009

तू

चमन से आती हवाओं में
तेरी छुअन का
अहसास है...

दूर रह कर भी
तू कितनी
पास है...

Thursday, January 15, 2009

किसका विश्वास करुँ?

किसका विश्वास करुँ?
तुम्हारा ?
मगर
तुम!!
तुम तो मेरे अपने हो...
अपनों पर अब
कौन
विश्वास करता है...
अपनों से ही तो
मानव डरता है.

Wednesday, October 8, 2008

चिर मौन!!

बेखौफ
वैभवशाली
किन्तु
गंभीर और मौन...
तन पर
अरमानी का मँहगा सूट
और
उनसे उठती
फ्रांसीसी परफ्यूम की
उत्तेजक महक
की अनकही आवाज!!
सबने सुनी
सबने गुनी
सब साथ हो लिए....

घबरा हुआ वो
आँख में आसूं लिए
बदबूदार
चिथड़ों में लिपटा
भूख से परेशान
दो रोटी के लिए
चीख चीख कर
आवाज लगता रहा..
न जाने क्यूँ!!

उसकी आवाज
किसी भी कान ने
न सुनी..
या कि सुन कर भी
अनसुनी कर दी!!

वो चिल्लाते चिल्लाते
मौन हो गया..
चिर मौन!!