Thursday, January 15, 2009

किसका विश्वास करुँ?

किसका विश्वास करुँ?
तुम्हारा ?
मगर
तुम!!
तुम तो मेरे अपने हो...
अपनों पर अब
कौन
विश्वास करता है...
अपनों से ही तो
मानव डरता है.

9 comments:

शाश्‍वत शेखर said...

अपना विश्वास करें
लेकिन ख़ुद से भी तो धोका मिलता है
किसका विश्वास करें

sanjay vyas said...

sunder. thoda aur vistaar apekshit hai.

अनिल कान्त : said...

बेहतरीन .....उत्तम

अनिल कान्त
मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

रचना गौड़ ’भारती’ said...

ब्लोगिंग जगत में स्वागत है
लगातार लिखते रहने के लि‌ए शुभकामना‌एं
सुन्दर रचना के लि‌ए बधा‌ई
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
http://www.rachanabharti.blogspot.com
कहानी,लघुकथा एंव लेखों के लि‌ए मेरे दूसरे ब्लोग् पर स्वागत है
http://www.swapnil98.blogspot.com
रेखा चित्र एंव आर्ट के लि‌ए देखें
http://chitrasansar.blogspot.com

रचना गौड़ ’भारती’ said...

ब्लोगिंग जगत में स्वागत है
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सुन्दर रचना के लि‌ए बधा‌ई
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
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kavi kulwant said...

Naman...
यकीं किस पर करूं मै आइना भी झूठ कहता है
दिखाता उल्टे को सीधा व सीधा उल्टा लगता है
कवि कुलवंत

संजय तिवारी ’संजू’ said...

बहुत बडिया अपने आप पर तो भरोसा रखना ही होगा बहुत बडिया

Pyaasa Sajal said...

bahut achha...kamaal ka andaaz hai...itna achha likhti hai aap,is blog par koi recent post nahi??

अनूप शुक्ल said...

बहुत दिन से आपनी नई पोस्ट नहीं लिखी? ऐसा क्यों?