Wednesday, September 23, 2009

तू

चमन से आती हवाओं में
तेरी छुअन का
अहसास है...

दूर रह कर भी
तू कितनी
पास है...

7 comments:

M VERMA said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति दी है इन चन्द शब्दो ने.
बहुत खूब

Apoorv said...

पहली बार पढ़ा आपको.. और अच्छा लगा.

दिलीप कवठेकर said...

कम शब्दों में ’तू’ के लिये एहसासात संपूर्ण हकीकत कह गये.

naveentyagi said...

चमन से आती हवाओं में
तेरी छुअन का
अहसास है...

दूर रह कर भी
तू कितनी
पास है...

sundar

सुलभ सतरंगी said...

अहसास है...
वाकई कुछ बात है.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह भाई
बल्ले बल्ले

Vijay Kumar Sappatti said...

ritu ji
pahli baar aapke blog par aaya .. sari rachnaaye padhi , main nishabd hoon ... aap bahut accha aur shashahkt likhti hai .. aapki rachnao me jo kashish hai wo anooti hai ..

mujhe bahut accha laga hai aapki poems ko padhkar ..

aapka dhanyawad ..

regards

vijay
pls read my 100th post
www.poemsofvijay.blogspot.com