Monday, December 7, 2009

एक रिक्तता

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टूटा

जो यह

विश्वास का धागा..

फिर जुड़ेगा नहीं..

और

एक रिक्तता

सालती रहेगी जीवन भर....

तुम्हें भी

और

मुझे भी!!!

14 comments:

रामकृष्ण गौतम said...

Very Nice Posting.



thanks and Regards

Ram K Gautam

M VERMA said...

टूटा धागा कब जुड़ता है
सुन्दर अभिव्यक्ति

boletobindas said...

कहां तलाश रही हैं अपने आप को....तलाश का सिलसिला बड़ा विचित्र है....

Arshad Ali said...

सुन्दर रचना ..
बधाई

शरद कोकास said...

कम शब्दों में बहुत बड़ी बात

vedvyathit said...

aisa kaise ho skta hai
dr. ved vyathit

अक्षिता (पाखी) said...

बहुत बढ़िया लिखा आंटी जी...

______________
'पाखी की दुनिया' में 'वैशाखनंद सम्मान प्रतियोगिता में पाखी'

vedvyathit said...

rhin ji ko bhi is ka bda ghra anubhv tha
rhimn dhaga prem ka mt to do ......
.....jude ganth pd jaye
dr. ved vyathit

nilesh mathur said...

आज आपकी कई रचनाएँ पढ़ी, कुछ अलग हटकर हैं आपकी रचनाएँ, बहुत अच्छा लगा पढ़कर!

nilesh mathur said...

aapke blog ko follow kis tarah kiya jaega.

Meet..... said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति साध्वी.............
आज की ताऱीख में हर तीसरा युवा इस कविता से समानुभूति कर रहा है..............साधारणीकरण हो रहा है............गागर में सागर.........एक साध्वी को एक फक्कड़ साधक का साधुवाद.........

राजेश उत्‍साही said...

सचमुच इतने कम शब्‍दों में बड़ी बात कह दी आपने। शुभकामनाएं।

मृत्‍युन्‍जय कुमार त्रिपाठी said...

Very good But Pleas Keep up

मृत्‍युन्‍जय कुमार त्रिपाठी said...

Very Good but Please Keep up.

Thanks,

MrityunjaY