Sunday, July 4, 2010

भ्रूण हत्या!!

नहीं चाहिये मुझे

तुम्हारी बराबरी का दर्जा

नहीं चाहिये मुझे

कोई सम्मान

नहीं चाहिये मुझे

रुपया पैसा...

मगर

मुझे इन सब के बदले

बस

और केवल

बस

जीने का अधिकार दे दो!!

मुझे मेरा परिवार दे दो!!

10 comments:

Udan Tashtari said...

गंभीर रचना!

निर्मला कपिला said...

जीने का अधिकार दे दो!!

मुझे मेरा परिवार दे दो!!
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति। शुभकामनायें

Akshita (Pakhi) said...

आपने तो बहुत अच्छे भाव प्रकट किये...

___________________
"पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है.

Vivek VK Jain said...

bahut sundar...

arvind said...

bahut hi maarmik rachna......

शरद कोकास said...

जायज़ हस्तक्षेप

sandhyagupta said...

Rachna gehra prabhav chodti hai.shubkamnayen.

Rajendra Swarnkar said...

साधवीजी ,
( यही नाम है न आपका ? )
नमस्कार !

भ्रूणहत्या की कविता के बहाने आपने परिवार की भावना को प्रसार और विश्वास प्रदान किया…
मुझे मेरा परिवार दे दो!!
मुझे बहुत अच्छा लगा ।
नारी के पास परिवार है तो उसे स्वतः ही बराबरी का दर्ज़ा और सम्मान भी प्राप्त है ।
ऐसी रचनाओं का अत्यधिक महत्व है ।
आभार !
- राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं

संजय तिवारी ’संजू’ said...

पहले पड नही पाय था मुझे मेरा परिवार दे दो

संजय तिवारी ’संजू’ said...

पहले पड नही पाय था मुझे मेरा परिवार दे दो