Monday, June 25, 2007

मेरा चिन्तन




मेरा चिन्तन

मानस के अंतःपटल पर

पर उठते चिन्तन

मैं कौन हूँ?

मैं कहाँ हूँ?

मैं क्या हूँ?

से परे

सतही चिन्तन के पार

एक अस्तित्व का प्रश्न

क्या मैं हूँ?

4 comments:

राकेश खंडेलवाल said...

ओ अनुरागी
अर्धचन्द्र की मधुर ज्योत्सना से लिपटे तुम
क्या निहारते
सरिता जल में कुछ बिम्बों को ?
मेरा बिम्ब
अगर चीन्हो
तो मुझे बताना
शायद
याद मुझे आ जाये
मेरा परिचय

शैलेश भारतवासी said...

कई बार यही प्रश्न स्वयम् से मैंने भी किया है।

Sanjeet Tripathi said...

यह प्रश्न हमारे मन में भी उठता है अक्सर और इसी के जवाब की तलाश ही ज़िंदगी है शायद!!
शुभकामनाएं!!

कुमार आशीष said...

यह प्रश्‍न करता कौन है... जरा तलाशिये।